कभी भी फोन काल इग्नोर न करें, मिस्ड काल का भी जबाब दें!

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कभी भी फोन काल इग्नोर न करें, मिस्ड काल का भी जबाब दें!



कभी भी किसी की फोन काल इग्नोर न करें, मिस्ड काल का भी जबाब दें। वर्तमान परिदृश्य में अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग फोन काल इग्नोर करते हैं, फ़ोन व्यस्त कर देते हैं।
अगर व्यस्त हैं, तो संदेश भेज दो, मगर कुछ लोग फोन उठाते ही नहीं हैं। मिस्ड काल का जबाब तक देना मुनासिब नहीं समझते हैं। कुछ लोग मोबाईल पर इतने व्यस्त रहते हैं कि हर समय उनके कान पर ही मोबाईल देखा जा सकता है। ऐसे ही कुछ अजनबी नंबरों से परहेज करते है।


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अजनबी नंबरों को वह ब्लॉक कर देते हैं, ब्लैकलिस्ट में डाल देते हैं। यह आदतें बहुत ही घातक सिद्व होती हैं। 
यह प्रलय की आहट है। अनावश्यक लगातार व्यस्त रहना उचित नहीं!

आधुनिक  समाज में समय-समय पर ऐसी घटनाएं व दर्दनाक हादसे घटित हुए हैं कि लोगों के मोबाईल व लैंड लाइन फोन न सुनने के कारण कुछ लोग जीवन गंवा बैठे। कुछ ऐसे हादसे हो गए कि लोग आज ताउम्र पछताते हैं।  
गत वर्ष एक घटना घटित हुई कि गांव में एक महिला को सुबह चार बजे दिल का दौरा पड़ा। घर के सदस्यों ने पडा़ेस में एक गाड़ी वाले को फोन किया, मगर उसने नहीं उठाया। महिला की तबीयत बिगड़ गई तो घर वाले उसे  पीठ पर डाक्टर के पास ले जाने लगे, मगर रास्ते में ही उस महिला के प्राण पखेरु उड़ गए। 



काश! उस पड़ोसी ने मोबाईल सुन लिया होता, तो उस महिला को बचाया जा सकता था। ऐसे ही एक बार एक परिवार कहीं शादी मे जा रहा था कि सुनसान व खाई वाले रास्ते में एक्सीडैंट हो गया। गाड़ी खाई में नीचे गिर गई, घर के सब सदस्य बेहोश हो गए, केवल एक नाबालिग 15 साल का युवक ही होश में था, वह भी खून से लथपथ था।
घायलावस्था में उसने रिश्तेदारों को फोन किया, मगर किसी ने भी रिसीव नहीं किया। बच्चे ने सबको मैसेज कर दिया कि फंला जगह पर कार का हादसा घटित हुआ है, रात का समय था। सुनसान व वीरान जगह पर कोई आवाजाही भी नहीं थी, नतीजन सुबह तक सब सदस्य मोेैत की नींद सो चुके थे। 

बाद में सब एक दूसरे को कोसने लगें कि फोन क्यों नहीं सुना। एक छोटी सी गलती के कारण पूरा परिवार अकाल ही मौत की नींद सो गया। अगर रिश्तेदारों ने समय पर फोन सुन लिया होता तो लोग बच सकते थे। 

ऐसे में मिस्ड काल को भी अनदेखा न करें!
कई बार हादसा होने के कारण अनजान नंबरों से भी काल आती है। एक बार रात का एक मकान में आग लग गई घर के लोगों ने पडोसियों को आवाजें लगाई, फोन किये मगर पडो़सी गहरी नींद में थे। बदहवाश घर के लोगों ने भीषण आग को काफी बुझाने का प्रयास किया मगर सब कुछ राख हो गया। फायर बिग्रेड के पहुंचने तक सारा सामान धू-धू जल गया था। एक समय था कि लोगों के घरों में केवल लैंडलाईन फोन होते थे। घंटी बजती थी तो सुन जाती थी। आज एक घर में एक नहीं  दस मोबाइल होते हैं। अपने अपने मोबाईल पर सब मस्त रहते हैं। 



लगभग मुफत का डाटा मिल रहा है, काम कुछ नहीं है, मंहगे सैट रखे हैं। ऐसे में काम के समय इतने व्यस्त हो जाते हैं कि पता नहीं कितने बडे अफसर हैं जो दिन भर काल आती रहती है। अब लोग बाईब्रेशन पर मोबाईल रखते हैं।साईलेंट कर रखते हैं। 

ध्यान रहे, कभी भी किसी का फोन इग्नोर न करें। कभी भी कोई मुसीबत में हो सकता है। अगर समय पर घायलों को इलाज मिल जाए तो अनमोल जीवन बचाया जा सकता है। मिस्ड काल का जबाब दें। कुछ लोग बहुत ही समझदार हैं कि हर काल का रिप्लाई देते हैं। मिस्ड काल का जबाब देते हैं। अनजान नंबरो का भी जबाब देते हैं।समाज को ऐसे हादसों से सबक लेना चाहिए। समाज को इस पर मंथन करना होगा। यह समाज हित में है।

लेखक: नरेन्द्र भारती (Writer Narender Bharti)

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