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कलयुग की सम्पूर्ण कहानी

पाप ही पाप!
मतलब कलयुग है!!

हिंसा, अनाचार, अपराध, असुरक्षा! 
मतलब कलयुग है!!

Story of Kaliyuga in Hindi (Pic: Sadhguru)

रोज कही सुनी जाने वाली इन बातों में आखिर 'कलयुग' है कौन और इसकी उत्पत्ति कहाँ से हुई?
वैसे आप चाहे जो कहें, लोग चाहे जो कहें पर कलयुग अपने सर पर सारा दोष ले लेता है, उन समस्त अधर्मों का, जो इंसान करता है.

पिछले तीन युगों से उसकी तुलना उसको अवश्य ही लज्जित करती होगी, क्योंकि कहा जाता है कि सतयुग, त्रेता युग और द्वापर युग से अधिक पाप, अनाचार इस युग में उत्पन्न हुए हैं और लगातार उत्पन्न हो रहे हैं.
तो ये कलयुग (Kaliyuga Story) है कौन?

इन प्रश्नों का उत्तर आपको देंगे पांडवों के वंशज, वीर अभिमन्यु के पुत्र, राजा परिक्षित!
इनकी भूल कहिये या मजबूरी, जो इन्होंने कलयुग को पृथ्वी पर राज करने की अनुमति दे दी.
यह हमें पता ही है कि हिंदू धर्म में चार युग आते हैं. आइये इनकी कहानी से आगे बढ़ते हैं...

पुराणों के अनुसार, सतयुग में पृथ्वी पर केवल आत्माएं हुआ करती थीं. संभवतः इसीलिए इस युग को  'वर्ल्ड ऑफ सोल' (World of Soul) भी कहा गया. कहते हैं कि इस युग में पाप था ही नहीं, पूर्णतः धर्म का युग था यह और इसी कारण भगवान को इस युग में अवतार लेने की ज़रुरत ही नहीं पड़ी. 
इसीलिए सतयुग की सर्वाधिक, 17280000 साल की उम्र मानी गयी. 

हालाँकि, कई जगहों पर आत्माओं की लम्बाई, उम्र इत्यादि की बातें भी आती हैं, पर श्रीमद्भागवत गीता में यह सिद्धांत गलत हो जाता है, क्योंकि आत्मा का कोई स्वरुप है ही नहीं!

बहरहाल, इससे आगे चलते हैं तो सतयुग के बाद त्रेतायुग आया. इस युग में थोड़े पाप ज़रूर बढे और उन सीमित पापों के नाश के लिए श्रीराम का अवतार हुआ. 
त्रेतायुग में भगवान राम अपने समस्त कर्मों को पूरा करके जीवित ही स्वर्ग की ओर प्रस्थान कर गए और उन्होंने बजरंग बली को आने वाले सभी युगों तक जीवित रहने का आशीष दिया.
थोड़ी मात्रा में पाप होने के कारण त्रेता युग की उम्र कुछ घटी और यह 4320000 साल तक माना जाता है.

तत्पश्चात द्वापर युग आया.
इस युग में तमाम पाप बढे. छल-प्रपंच, काम, क्रोध, शत्रुता आदि व्यसनों में काफी बढ़ोत्तरी हुई. संभवतः इसीलिए सतयुग और त्रेता से इसकी उम्र कम हुई, जो 864000 साल तक मानी गयी. 

द्वापर युग में धर्म पर कठोर प्रहार किया गया और इसीलिए भगवान श्रीकृष्ण अपनी समस्त कलाओं के साथ धरती पर आये और पाप का नाश किया. 

आब बारी आती है कलयुग की, जिसमें धर्म के आखिरी छोर तक, समाप्ति की कगार तक पहुँचने की भविष्यवाणी हुई है. पाप चरम पर होगा, तो लालच-हिंसा की कोई सीमा न होगी और ऐसे में भगवान विष्णु, कल्कि के अवतार (Bhagwan Kalki Avatar) में प्रकट होंगे, ऐसी मान्यता है.

अब आते हैं मुख्य कथा पर कि धरती पर कलयुग आया कैसे?

महाभारत की समाप्ति के बाद महाराज युधिष्ठिर ने सारा राजपाठ पुत्र परिक्षित (Mahabharata King Parikshita) को सौंप दिया और स्वयं पांचो पांडव, द्रौपदी के साथ मोक्ष हेतु हिमालय की ओर प्रस्थान कर गए.
परीक्षित एक सम्राट बनकर अपनी जिम्मेदारी को निभाने लगे.

बताते हैं कि पांडवों के हिमालय गमन के बाद माँ धरती व धर्म, माता सरस्वती नदी के अलग-अलग छोर पर क्रमशः गाय व बैल के रूप में बातें कर रहे थे.

गाय रूपी धरती बेहद दुखी थीं तो धर्म रुपी बैल ने पूछा कि अब तो महाभारत के पश्चात् चीख - पुकार, हिंसा -नफरत समाप्त हो गया है, तो आप निराश क्यों है?

तब धरती रुपी गाय ने कहा कि, हे धर्म! क्या तुम सच में  देख नहीं पा रहे हो कि तुम्हारे चारों पैरों में अब मात्र एक पैर ही बचा है!


आगे माँ धरती ने यह भी कहा कि पहले योगेश्वर श्री कृष्ण के चरण मुझ पर पड़ते थे, और तब मैं निश्चित ही सौभाग्यशाली थी, पर अब ऐसा नहीं है. 

इन दोनों की आगे कुछ बात होती, ठीक तभी असुर के रूप में कलयुग वहां आ धमका!
आते ही उसने गाय और बैल को परेशान करना शुरू कर दिया, चूंकि आसुरी प्रवृत्ति होती ही यही है.

ठीक तभी सम्राट परिक्षित वहां से गुजरे और निर्दोष-निरीह, गाय व बैल को दुखी होते देख उन्होंने कलयुग को ललकारा कि- हे दुष्ट - पापी! 

तू कौन है? 

Kaliyuga ready to kill Dharma and King Parikshita Entry (Pic: FirstPost)

उन्होंने कलयुग पर धनुष तानते हुए कहा कि तेरा अपराध क्षमा योग्य नहीं है और तेरा वध किया जाना ही उचित है.
हालाँकि, परिक्षित बैल के रूप में धर्म को पहचान गए थे. 

उन्होंने धर्म से तत्काल पूछा कि यह कौन है? 

पर धर्म ने जवाब न दिया!

तब राजा परीक्षित ने कहा कि - "धर्म को भली-भांति जानने के पश्चात भी किसी के विषय में गलत न कहते हुए अपने ऊपर अत्याचार करने वाले का नाम तक नहीं बता रहे हैं?"

ठीक तभी कलयुग ने पैंतरा बदला व सम्राट के पैरों में गिर गया व अपना परिचय दिया कि, वह कलयुग है!
धर्मज्ञ राजा सब समझ गए कि सतयुग में धर्म के चार चरण थे, तो त्रेतायुग में तीन चरण हुए और एक का नाश हो गया.

ऐसे ही द्वापर में दो व आज कलयुग ने एक बचे हुए चरण को भी नुकसान पहुंचा दिया है. ऐसे में क्रोध में आकर सम्राट परीक्षित कलयुग का वध करने ही वाले थे कि कलयुग ने उनके पैर पकड़कर शरणागति मांग ली!

सम्राट को कलयुग ने धर्म में ही बाँध लिया, क्योंकि शरणागति को शरण न देना अधर्म ही माना जाता था.

परन्तु राजा परिक्षित बुद्धिमान भी थे और कलयुग से कहा कि -अधर्म, अनाचार, पाप, झूठ, चोरी-डकैती, कपट-प्रपंच, दरिद्रता-गरीबी इत्यादि तमाम दोषों का मूल कारण केवल तुम ही हो, इसलिए मैं तुम्हे अपने राज्य में वास नहीं करने दूंगा.

क​लयुग तब गिड़गिड़ाने लगा और राजा से उसने कहा कि - सम्राट!
आपका साम्राज्य तो सम्पूर्ण पृथ्वी पर ही है और अगर आप मुझे ऐसे निकालेंगे तो मैं कहां जाउंगा? 

मैं आपकी शरण में हूँ, इसलिए मुझे कोई निश्चित स्थान प्रदान करें!

परिक्षित ने विचार किया और कहा कि जहाँ द्यूत, मद्यपान, परस्त्रीगमन व हिंसा होती हो, वहाँ असत्य, मद, काम और क्रोध का निवास होता है, तो वहीं तेरा स्थान निश्चित करता हूँ!

कलयुग ने फिर प्रार्थना की और कहा कि सिर्फ इतना स्थान मेरे लिए पर्याप्त नहीं है.

सम्राट उसकी चाल नहीं समझ सके और उसे स्वर्ण में भी स्थान दे दिया.

यह सुनते ही कलयुग पांच भागों में बंट गया और राजा के दिए गए अधिकार क्षेत्र में उसका अलग-अलग हिस्सा प्रविष्ट हो गया. चूंकि पांचवा हिस्सा तो खुद स्वर्ण था, और स्वर्ण मुकुट सम्राट ने स्वयं ही धारण किया था, बस फिर क्या था कप​टी कलयुग परिक्षित के स्वर्ण मु​कुट में प्रवेश कर गया.

चूंकि राजा परीक्षित सम्पूर्ण पृथ्वी के सम्राट थे, अतः मार्कण्डेय पुराण के अनुसार कलयुग सम्पूर्ण पृथ्वी पर काबिज़ हो गया. 
महान गणितज्ञ आर्यभट्ट की किताब आर्यभट्टियम में कलयुग के बारे में उन्होंने 23 साल की उम्र में ही लिखा था कि वह समय कलियुग का 3600वां वर्ष था.

शास्त्रों में युगों का आंकड़ा बताया गया है, जिसके अनुसार मानव का एक मास, पितरों के एक दिन व रात के बराबर है व मनुष्य का एक वर्ष, देवता के एक दिन व रात के समान बतलाया गया है.

मतलब हम मनुष्य 30 वर्ष व्यतीत करते हैं, उसके बराबर देवताओं का एक मास होता है.

इसी प्रकार मानव के 360 वर्ष, देवताओं का एक वर्ष (Divya Year of Gods) कहलाते हैं. इसी गणना को लें तो मनुष्य के 432000 वर्ष, यानि देवताओं के 1200 दिव्य वर्ष का पूरा एक कलयुग माना गया है. अर्थात कलयुग की उम्र 4,32,000 साल लंबी बतलाई गई है. 

ख़ास बात यह है कि अभी तक कलयुग का मात्र एक चरण पूर्ण हुआ है, मतलब 5118 वर्ष बीत चुके हैं और तकरीबन 426882 वर्ष बाकी हैं (Age of Kaliyuga).

ब्रह्मवैवर्त पुराण की मानें तो अभी पाप बहुत बढेगा. जब कलयुग अपने चरम पर होगा तब मात्र पांच वर्ष की उम्र में स्त्री गर्भवती हो जाएगी व 16 वर्ष की उम्र तक मनुष्य का बुढापा आ जाएगा व अधिकतम 20 वर्ष की आयु तक उसकी आत्मा मृत्यु प्राप्त कर लेगी. इसमें इन्सान के बौने होते जाने का वर्णन भी किया गया है. इतना ही नहीं, कलयुग का जब 50000 साल पूरा होगा, तब मोक्ष दायिनी गंगा सूख जाएँगी और पाप से त्रस्त होकर श्री बैकुंठधाम चली जाएंगी. आप जानकर हैरान हो जायेंगे कि मात्र 10 हजार वर्ष पूरे होने पर धरती से देवताओं का पलायन स्टार्ट हो जाएगा, क्योंकि कलयुग के पापों को वह सहन नहीं कर सकेंगे.
पूजा, धर्म - कर्म, सब बंद हो जायेंगे!


प्रकृति क्रुद्ध होकर विनाश फैलाएगी और चारों ओर हाहाकार मच जायेगा!

नया सूर्योदय 

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, ऐसी स्थिति में भगवान विष्णु कल्कि रूप में अवतरित होंगे. 
मात्र तीन दिन के लिए धरती पर आकर वह समस्त अधर्मी लोगों का नाश कर देंगे.

Kalki Incarnation, Bhagwan Kalki Avatar (Pic: DailyHunt)

इसके तत्काल बाद बाद पृथ्वी पर मोटी धार से अनवरत वर्षा होगी और पृथ्वी पुनः सम्पूर्ण रूप से जल मग्न हो जाएगी. फिर 170,0000 वर्षो का संधि काल (एक युग के अंत दूसरे युग के प्रारंभ के बीच के समय को संधिकाल कहते हैं) होगा और संधि काल के उपरांत पृथ्वी पर 12 सूर्य प्रकट होंगे. 

तब उनकी गर्मी से पृथ्वी का अनावश्यक जल सूख जाएगा व फिर सतयुग की शुरुआत होगी!

बता दें कि कलयुग के अंत वर्णन न केवल हिन्दू धर्म में बल्कि प्रलय का वर्णन कुरान व बाइबल (Kaliyuga in Quran and Bible) में भी आया है.

पर यह आगे की बातें हैं.
अभी तो कलयुग या कलियुग (Kalyuga or Kaliyuga) के प्रभाव से जितना अधिक हम खुद को बचा लें, यह हमारे चरित्र - बल (Strength of Character) की परीक्षा में हमें उत्तीर्ण कर देगा. 

आप क्या सोचते है, कमेन्ट-बॉक्स में अवश्य बताएं.



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