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"महाकाल" के दर्शन से ही दूर हो जाती है विपत्ति


"अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चंडाल का
काल भी उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का" …!

भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखने वाले मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर की महिमा कितनी अपरंपार है यह बताने की आवश्यक्ता नहीं है। यहाँ आने वाले भक्त न केवल इस देश के होते हैं बल्कि विदेश से भी लोग इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। 

इस पौराणिक मंदिर को लेकर कहा जाता है कि जब सृष्टि की रचना हो रही थी, उस समय सूर्य की 12 रश्मियां सबसे पहले धरती पर गिरीं और उन्हीं से धरती पर 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना हुई। उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भी उन्हीं सूर्य रश्मि से उत्पन्न हुआ एक ज्योतिर्लिंग है।

कहा जाता है कि उज्जैन की पूरी धरती को शमशान भूमि कहा जाता है क्योंकि यहाँ की भूमि 'उसर' यानी की उपजाऊ नहीं है। उज्जैन के इस मंदिर में तंत्र मंत्र की क्रिया करने वाले लोग विशेष रूप से यहाँ आते हैं क्योंकि इस मंदिर का मुख दक्षिण दिशा की ओर है। महाकाल के इस मंदिर में और भी बहुत सारे देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं, जिसमें माता पार्वती और गणेश तथा कार्तिकेय भगवान का नाम आता है। इतना ही नहीं, महाकाल की नगरी उज्जैन में हर सिद्धि भगवान, काल भैरव भगवान, विक्रांत भैरव आदि देवताओं के भी मंदिर स्थापित हैं।
  

 'महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग' के हैं तीन खंड 

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का स्वरूप तीन खंडों में विभाजित है, जिसमें सबसे निचले खंड में महाकालेश्वर(Mahakal) स्थित हैं। बीच में यानी कि मध्य खंड में 'ओमकारेश्वर' भगवान की पूजा की जाती है। वहीं ऊपर के खंड में नागचंद्रेश्वर मंदिर स्थित है। 

कहा जाता है कि नागचंद्रेश्वर शिवलिंग के दर्शन साल में एक बार ही किया जा सकता है, वह भी नाग पंचमी के अवसर पर।

Mahakal Temple Ujjain (Pic: hindirush)





कैसे हुई 'महाकालेश्वर' मंदिर की स्थापना?

पुराणों में एक कहानी प्रचलित है जिसके अनुसार मध्य प्रदेश के उज्जैन (Mahakal Temple, Ujjain)शहर में जो तत्कालीन समय में अवंतिका नगरी के नाम से प्रसिद्ध था। उक्त नगरी में एक ब्राह्मण रहता था, जिसके चार पुत्र थे। उस समय राक्षसों ने उस शहर को काफी परेशान कर उत्पात मचा रखा था, जिससे परेशान होकर ब्राह्मण ने भगवान शिव की उपासना की, और भगवान शिव ने प्रसन्न होकर राक्षस का वध कर ब्राम्हण और उसके पुत्र की रक्षा की। तब से ब्राह्मण की प्रार्थना पर भगवान शिव उज्जैन में ही बस गए और इस तरीके से उज्जैन में 'महाकाल' मंदिर की स्थापना हो गई।  


उज्जैन आकर महाकाल के दर्शन करना कहते हैं तो यहाँ आने के बाद सुबह होने वाली भस्म आरती जरूर देखें, क्योंकि इस मंदिर में महाकाल की आरती और श्रृंगार ताजे मुर्दे की भस्म से की जाती है। महाकाल के दर्शन के बाद जूना महाकाल का दर्शन करना आवश्यक बताया जाता है।
Mahakal Temple Ujjain (Pic: tripoto)



कैसे पहुंचे महाकाल मंदिर ?
यहाँ पहुँचने के लिए सबसे बड़ा और नजदीकी शहर इंदौर है। आप यहां हवाई मार्ग, रेल मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। इंदौर से उज्जैन की दूरी लगभग 45 किलोमीटर है। 
कहा जाता है कि महाकाल के दर्शन मात्र से आपके ऊपर आई सारी विपत्ति दूर हो जाती है क्योंकि- वो अजन्मे है, उनका ना आदि है ना अंत है अविनाशी है, कालोपरि है, पंच महाभूतो के नाथ “भूतनाथ” है वो… कालो के काल महाकाल है वो… जय श्री महाकाल


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