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शिक्षक, कोविड -19 और तनाव: कैसे निपटें?

Teacher, Covid 19 and Depression Cure

शिक्षा के इस बदलते माहौल में शिक्षक भी अपने आप को पीछे नहीं रख सकते हैं।
इसलिए हमें बहुत ही अच्छे तरीके से सोचना पड़ेगा कि विद्यार्थी और शिक्षकों पर इसका क्या असर पड़ रहा है और आने वाले दिनों में यह क्या रूप लेगा। 
आईये हम जानते हैं कि इस महामारी के दौरान शिक्षक किन-किन समस्याओं से जूझ रहे हैं।  

हम सभी तो हर साल शैक्षिक वार्षिक गतिविधि से परिचित ही थे, परंतु इस साल मार्च से ही पूरी दुनिया में इस कोरोना महामारी ने एक बरगत के पेड़ का स्वरुप ले लिया था। भारत में हम सब के लिए एक नए तरीके से एवं नए शैक्षिक गतिविधि से पढ़ना और पढ़ाना एकदम नया था। नए - नए टूल्स जो कि मोबाइल पर कार्य नहीं करते, उनके लिए लैपटॉप या कंप्यूटर की जरुरत पड़ेगी। इससे सभी शिक्षक अवगत भी नहीं होंगे, शुरुआती दिनों में छात्रों और शिक्षकों को आपस में समन्वय रखना मुश्किल होता होगा। 

गणित जैसा विषय बिना व्हाइटबोर्ड या फिर कंप्यूटर पर बिना ग्राफ़िक टेबलेट की सहायता से पढ़ाने में काफी मुश्किल होती होगी और संगीत जैसा विषय भी बिना वाद्यों की सहायता से पढ़ाना घर से यह एक आव्हानात्मक कार्य है। लेकिन हमारे देश के सभी शिक्षकों ने अपने अथक प्रयास से पढाई को सुचारु रूप से पूर्ण करवाया है।

पारंपरिक शिक्षा को नए ऑनलाइन माध्यम के रूप में बदला गया है। इस नए स्वरुप को समझने से पहले हमें अपने देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को समझना बहुत जरुरी है। ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली में शिक्षकों को कई तरह के छात्रों के रिकॉर्ड ऑनलाइन माध्यम से ही रखने पड़ रहे हैं।  

पहले स्कूल का एक निर्धारित समय था, अब नए तौर तरीकों में शिक्षक और विद्यार्थी अपने आप को ढालने की कोशिश कर रहे हैं।

घर पर रहने के कारण शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच में एक समन्वय रखना पड़ेगा। हमें ये भी ध्यान में रखना है कि विद्यार्थी ज्यादा देर तक स्क्रीन पर न हों। और इसी तरह हमें शिक्षकों का भी ध्यान रखना पड़ेगा। नए टूल्स सीखने और उसे सावधानी से इस्तेमाल करना यह भी एक कठिन कार्य है। शिक्षकों को यह भी लगता होगा कि उनकी क्लास को हर समय अभिभावक देखते होंगे, ऐसी स्थिति में पढाई के समय शिक्षक अपने आप को दवाब में महसूस कर रहे होंगे। इस दवाब का कारण मानसिक तनाव का रूप भी ले सकता है। इस दौरान शिक्षकों के ऊपर ये भी जिम्मेदारी है कि जो पाठ उन्होंने पढाया है, उसका समय पर मूल्याङ्कन करना, आंकलन करना... कि छात्रों को वो समझ में आया कि नहीं!
ऑनलाइन होमवर्क चेक करना भी बहुत कठिन कार्य हो गया है।

सभी शिक्षक ज्यादातर समय दिन में मोबाइल का उपयोग करते हैं, इसलिए छात्र और अभिभावक किसी भी समय कोई भी समस्या पूछते हैं। इसलिए इतने कम समय में सब का जवाब देना और दिन में पूरे समय तत्पर रहना, ये भी एक तनाव का कारण बन सकता है। ये भी अनिश्चितता है कि विद्यालय कब खुलेंगे और कब सुचारू रूप से कार्य शुरू होगा। इसका असर भी मानसिक तनाव का कारण बन रहा है।

ज्यादा समय लैपटॉप, कंप्यूटर और मोबाइल में देखने से आँखों पर और गर्दन एवं रीढ़ की हड्डी पर इस का विपरीत परिणाम हो रहा है। इस महामारी में शिक्षकों को इस बात की तरफ ध्यान देना बहुत जरुरी हो गया है।

अतः शिक्षकों को इससे बचने के लिए और अगर आप तनाव महसूस कर रहे हैं, तो नीचे दिए उपाय आप करेंगे तो निश्चित ही इस सबसे उबर आयेंगे।  

  1. सकारात्मक दृष्टीकोण: दिन में हर समय जो भी सोचें, वह हमेशा सकारात्मक तरीके से ही सोचें। एक अच्छा मन एक अच्छे आदमी की पहचान है। हम ही अपने मन के राजा भी हैं, ये याद रखें। जो भी सोचते हैं, उसका परिणाम हमारे जीवनशैली पर होता है, अतः आप सकारात्मक ही सोचें।
  2. नियमित व्यायाम और योगासन: सुबह जल्दी उठें, हमारे पूर्वज हमेशा से कहते आये हैं कि अगर आप को अच्छा स्वास्थ्य चाहिए, तो रात को जल्दी सोना चाहिए और सुबह जल्दी उठें। इसके साथ ही 20 मिनट कम से कम शारीरिक व्यायाम, 4  प्राणायाम जिसमें भस्त्रिका ,कपालभाती , अनुलोम-विलोम और भ्रामरी शामिल हैं, उसे करें। इसके बाद अगर थोड़ी देर ध्यान में बैठें, तो आप का शरीर और मानसिक स्वास्थ्य बहुत अच्छा होगा। किसी भी प्रकार के बुरे विचार आप के मन में नहीं आयेंगे। आप हमेशा अपने आप को प्रफुल्लित महसूस करेंगे।
  3. अपने परिवार, दोस्त और जिनके साथ आप बात कर सकते हैं, उनके साथ अच्छी बातें ही करें। ऐसी ही चीजों पर ध्यान दें, जिससे आप को आनंद मिलता होगा।  
  4. अपने खान पान पर विशेष ध्यान दें, पौष्टिक चीजें ही खाएं।  
  5. हमेशा तनाव रहित रहने की कोशिश करें।  
  6. अपनी कार्यप्रणाली तय करें और उसे समय पर पूर्ण करें, ताकि आप को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
  7. ये याद रखें कि इस महामारी के दौरान अगर कोई अभिभावक आप से अच्छे तरीके से बात नहीं करता है, तो वह भी किसी तनाव में हो सकता है। आप अपने आप को धैर्य और संयम में रखें और कारण जानने की कोशिश करें।  
  8. रोज कोई नयी कविता या किताब पढ़ें, आप संगीत भी सुन सकते हैं।  इस से आप के मन को शांति मिलेगीऔर आप तनाव रहित होंगे।  

इस का अच्छा परिणाम यह होगा कि हम अपने छात्रों को ठीक तरीके से पढ़ा पाएंगे और एक अच्छे समाज का निर्माण करने में सक्षम होंगे।

- सुशील प्रकाश जोशी
(लेखक पेशे से अध्यापक हैं और उपरोक्त विचार उनके अपने हैं)
Mail: [email protected]


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1 Comments

  1. बहुत ही अच्छा लेख है सर, इससे बहुत कुछ सीखने को मिला है। जीवन की तरफ देखने का सकारात्मक दृष्टिकोण बढ़ा है।

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