युथ आईकॉन 'हिमा दास' की कहानी कितनी जानते हैं आप?

गोल्डन गर्ल हिमा दास आज किसी परिचय की मुहताज नहीं हैं। बेहद कम उम्र में अपने देश के लिए सोना जीतने वाली हिमा के जज्बे पर हर भारतीय गर्व करता है। असम के नगाँव जिले के कांधूलिमारी नामक गाँव में जन्मी ऐथलीट हिमा के पिता का नाम  रणजीत दास और माँ का नाम जोनाली दास है। हिमा के पिता एक साधारण किसान हैं और उनकी चार संतानों में हिमा सबसे छोटी हैं।

हिमा को शुरू से ही स्पोर्ट्स से लगाव था और अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए वो अपने गांव के लड़कों के साथ फुटबॉल खेला करती थीं। सभी लड़कों के बीच अकेली लड़की हिमा की स्टेमिना और फुर्ती देखने लायक होती थी। हिमा के इसी स्टेमिना को देखकर वहां के स्थानीय कोच ने उन्हें एथलीट में अपना कैरियर आजमाने के लिए प्रेरित किया।

Indian Sprint Runner Hima Das (Pic: thehindubusinessline)

इसके लिए उन्होंने हिमा को  रोजाना दौड़ने का सुझाव दिया। चूँकि हिमा के गांव में कोई रनिंग ट्रैक नहीं था फिर भी हिमा ने हार नहीं मानी और उन धान के खेतों में दौड़ना शुरू कर दिया, जिसमें दौड़ना बेहद मुश्किल काम होता है। हिमा के जुझारूपन और मेहनत का ही नतीजा था कि उन्हें जिला स्तरीय तथा राज्य स्तरीय खेलों में दौड़ने का मौका मिला जिसमें हिमा ने कई सारे पदक जीते।

परन्तु हिमा का सफर यहीं रुकने वाला नहीं था क्योंकि हिमा पर अब 'स्पोर्ट्स एंड युथ वेलफेयर' निपुन दास  की नजर पड़ चुकी थीं। कोच ने हिमा को अपने परिवार, अपने गांव से दूर गुवाहाटी आकर रहने की सलाह दी जो कि हिमा के लिए बेहद कठिन कार्य था।

गुवाहाटी हिमा के गांव से 140 किलोमीटर दूर था लेकिन अपने सपने के लिए हिमा दास ने अपने परिजनों तक से दूर जाने जैसा कठिन निर्णय भी लिया। अब हिमा दास का चुनाव एथलीट क्लब में हो चुका था और उन्हें इंतजार था उस मौके का जब वो अपनी प्रतिभा से देश के लिए मेडल ला सकें। जल्दी ही उन्हें 2018 के 'कॉमनवेल्थ गेम' में हिस्सा लेने का मौका मिला।

वहां हिमा दास को कोई पदक तो नहीं मिला लेकिन छठे स्थान के साथ उन्हें आगे बढ़ने का हौसला जरूर मिला।

इसके बाद आया 2019 का वह समय जब पोलैंड में 'पोज़नान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स' का आयोजन हुआ और 2 जुलाई को 200 मीटर की रेस में हिमा ने अपना पहला गोल्ड जीता। इसके तुरंत बाद ही 7 जुलाई को पोलैंड में अपना दूसरा गोल्ड और 13 जुलाई 2019 को चेक रिपब्लिक में अपना तीसरा गोल्ड मेडल जीता।

हिमा के पैरों में सुनहरे पंख लग चुके थे और वो रुकने वाली नहीं थीं। 17 और 20 जुलाई को चेक रिपब्लिक में ही क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर की प्रतियोगिता में चौथा और पांचवा गोल्ड अपने नाम किया। हिमा ने देश के लिए कुल 6 गोल्ड मेडल जीते हैं।

इतनी कम उम्र में इस जीवटता को दिखाने वाली इस महिला धावक की प्रशंसा स्वयं देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी ने की, लेकिन किसी भी प्रशंसा से आगे हिमा दास का विश्वास उन लड़कियों के लिए नजीर है, जो सोचती हैं कि वह गाँव की हैं तो कुछ कर नहीं सकतीं या फिर उनका बैकग्राउंड कमजोर है, तो वह कुछ कर नहीं सकतीं।

लड़कियां ही क्यों, लड़कों को भी हिमा दास की सफलता से निश्चित ही प्रेरणा लेनी चाहिए।


Web Title: Indian Sprint Runner Hima Das Article in Hindi

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