फोटो जर्नलिस्ट बनना है, तो जान लें ज़रूरी नियम

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फोटो जर्नलिस्ट बनना है, तो जान लें ज़रूरी नियम

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दुनिया भर में इंटरनेट का प्रसार जैसे-जैसे बढ़ा है, वैसे-वैसे कैरियर (Career Opportunities) के नए-नए अवसर भी खुलते जा रहे हैं.
यूं तो फोटोजर्नलिज्म (Photojournalism) का पहले से ही पत्रकारिता में काफी महत्वपूर्ण रोल रहता था, किंतु अब यह और बढ़ गया है. चूंकि अब प्रत्येक हाथ में मोबाइल के रूप में लोगों के पास कैमरा मौजूद है, और इसीलिए स्पेशलिस्ट का महत्त्व अब कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है.

व्यावसायिक रूप से देखें तो तमाम स्टॉक इमेजेस, इमेजेस बाजार जैसी कई ऐसी वेबसाइट हैं, जहां पर आपको दूसरे फोटोग्राफरों द्वारा खींची गयी बड़ी फोटोग्राफी रेंज (Big Photography ragnge) दिख जाती है, और दूसरे बड़े पब्लिशर वहां से खरीद कर फोटोग्राफी अपने पब्लिकेशन के लिए इस्तेमाल करते हैं.
पर सामान्य फोटोग्राफी से इतर फोटोजर्नलिज्म (Photo Journlism and general Photography) थोड़ा अलग है और इससे जुड़े कोड ऑफ़ कंडक्ट बेहद महत्त्व के हैं. इससे जुड़े नियम क्या हैं, आइए जानते हैं...

जब भी पत्रकारिता की बात होती है तब कोड आफ कंडक्ट (Code of Conduct in Journlism) बड़े इंपॉर्टेंट हो जाते हैं, और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (Press Council of India) ने बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा है कि फोटोजर्नलिस्ट भी दूसरे पत्रकारों की तरह वहां जा सकता है, जहां पर पब्लिक वर्क या पब्लिक इंटरेस्ट (Public Interest and Journalism) शामिल हो.
मतलब जहां भी पब्लिक वर्क या उससे जुड़ी गतिविधियों की बात होती हो, चर्चा होती हो, कोई इवेंट हो, पब्लिक से जुड़ा कोई इंसिडेंट हो, वहां पर दूसरे जर्नलिस्ट्स के साथ फोटोजर्नलिस्ट भी जा सकता है और अपने लिए फोटो एकत्रित कर सकता है.
Photo Patrakar kya kar sakta hai aur kya nahi?

हालाँकि, फोटो जर्नलिस्ट को बड़ी सावधानी रखनी होती है और उसे किसी अश्लील ढंग से फोटो खींचने या फिर जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाने से बचने की आवश्यकता बतायी गयी है. 
चाहे-अनचाहे कई इवेंट्स में इस तरह की फोटो आ ही जाती हैं, तो उसे फोटो जर्नलिस्ट को पब्लिश (Photojournalism code of conduct) करने से बचना चाहिए. साथ ही फोटो जर्नलिस्ट को बेहद विनम्र ढंग से भी व्यवहार करने की ताकीद प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों में की गई है.


इसी क्रम में कहा गया है कि सभी के साथ विनम्रता के साथ साथ प्रतिष्ठा और सम्मान का व्यवहार किया जाना चाहिए, खासकर कमजोर व्यक्तियों का, और अगर कोई पीड़ित व्यक्ति है, फिर उसके साथ तो विशेष विनम्रता से पेश आया जाए. 
ध्यान रखने वाली बात यह है कि इमोशन में अगर कोई व्यक्ति अगर कुछ बातें करता है, अपना निजी दुख बयान करता है, तो सनसनी के लिए उसे गलत ढंग से प्रसारित करने से बचना चाहिए, या फिर उसे जनहित का ध्यान रखकर ही आगे बढ़ाना चाहिए, ना कि पब्लिसिटी पाने के लिए उसे प्रकाशित कर देना चाहिए.
यहां गोपनीयता का भी खास ध्यान रखना चाहिए, खासकर तब जब कोई मामला जनहित का नहीं है.

Rural Photography (pic: mithilesh2020)


ऐसे में गोपनीयता के नियमों का ध्यान रखना जरूरी है. यूं जनहित के कुछ मामलों में फोटो जर्नलिस्ट या वीडियो जर्नलिस्ट को कुछ छूट ज़रूर दी गई है, जिसमें चेहरा ब्लर करके या कुछ हिस्सों को सूचनार्थ दिखलाया जा सकता है, जिससे जनहित जुड़ा हुआ हो.

आजकल फोटोज के साथ मर्फिंग बहुत चल रही है, मतलब छेड़छाड़! 
Photo morphing / editing is not allowed in Photojournalism.

ध्यान रखें कि जो भी ओरिजिनल तस्वीर ली गई है, उसे ही प्रकाशित किया जाना चाहिए, ना कि उससे कोई छेड़छाड़ करना चाहिए. इसी प्रकार से अगर कोई वीडियो रिकॉर्डिंग करता है, तो उसमें भी छेड़छाड़ को मना किया गया है, खासकर अगर उसकी नियत गलत हो. 

किसी भी ऑब्जेक्ट की, इवेंट की, या व्यक्ति की गलत व्याख्या करने वाली फोटो का प्रकाशन वर्जनीय है. इसमें आप यह भी ध्यान रखिए कि गलत रेफरेंस भी यहाँ वर्जित है. मतलब जिस रेफरेंस में, जिस इवेंट में फोटो खींची गई है, वही चीज हूबहू प्रकाशित होनी चाहिए, ना की उसकी गलत व्याख्या होनी चाहिए, गलत रिफरेन्स दिया जाना चाहिए.
उदाहरण के लिए अगर दो विपक्षी पार्टी के नेता आपस में मिलते हैं, मान लें कि किसी होली मिलन कार्यक्रम में, तो आप उस मिलन को राजनीतिक वार्ता बताकर प्रकाशित नहीं कर सकते, ऐसा करना, प्रेस कौंसिल के नियमों में वर्जित है.
(Journalism and Photography Article in Hindi)


ध्यान रखिए कि अगर आप तस्वीरों से छेड़छाड़ करते हैं तो उसे ब्लैकमेल की श्रेणी में रखा जा सकता है, जो एक पत्रकार के लिए कलंक होता है. बेशक आप फोटो जर्नलिस्ट हैं, किंतु आपको यह नियम बड़ी सावधानी से समझना चाहिए .

इसमें एक और महत्वपूर्ण नियम है, जिसे डिग्निटी आफ डेथ (Dignity of Death in Journalism / Photojournalism) कहा जाता है.
मतलब कि अगर कोई व्यक्ति मृत है, तो उसके शव को विकृत रूप से या शर्मिंदगी के भाव से नहीं दिखलाना चाहिए. उसमें सम्मान / डिग्निटी का भाव होना अनिवार्य है. ऐसे में आप इस तरीके से फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी ना करें कि उससे, मृतक के परिवार को शर्मिंदगी हो, बल्कि डिग्निटी आफ डेथ के नियम का आप ध्यान रखें.

ध्यान रखिए आपकी फोटो या वीडियो से किसी हालत में, कोई घटना या उसका रियल संदर्भ नहीं छूटना चाहिए. वह इंफॉर्मेशन देने वाली ही न हो, बल्कि सही रिफरेन्स से इंफॉर्मेशन (Information and Reference of News and Photo in Journalism) दे, उसका कैप्शन सही हो और यह बेहद जरूरी नियम है, जो आप को ध्यान रखना चाहिए.

पत्रकारिता की भाषा में कहें तो तोड़-मरोड़ कर, या उसका मिस यूज करने की नियत से आप फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी ना करें.

Ganga River Bank, Ballia, UP (Pic: mithilesh)


इसी क्रम में बताएं तो किसी टेररिस्ट अटैक, कम्युनल रायट या फिर दूसरे वायलेंस की तस्वीरों को दिखाने में बेहद सावधानी रखनी चाहिए, जिससे लोगों में डर न फैले!

कल्पना कीजिए कि अगर कहीं किसी सोसाइटी में कोई दंगा-फसाद हो गया, तो उसे आप इस तरीके से ना दिखाएं, जिससे कि दूसरी जगहों पर भी हिंसा भड़क जाए. यह पत्रकारिता के नियमों के बिलकुल खिलाफ है. अगर आप किसी शव को क्षत-विक्षत छाप देते हैं, मीडिया में चलाते हैं तो उससे लोगों में रोष फैलता है और ऐसे में आपकी पत्रकारिता दूषित हो जाती है, और साथ ही दोषी भी!
इसीलिए जनहित का, समाज के हित (Public Interest is important in Phtojournalism) का अवश्य ध्यान रखें. 


हां, जहां बहुत जरूरी है, वहां सीन को ब्लर करके दिखला सकते हैं, जिससे लोगों को सूचना मिले, ना कि लोगों को उकसावा महसूस हो!
Blurr objects in photo or video, where required in Photo / Video journalism!

ध्यान रखिए, एक और बहुत जरूरी बात है कि एक फोटो जर्नलिस्ट या वीडियो जर्नलिस्ट को, या फिर जर्नलिस्ट को ही कह लें, ऐसे लोगों से किसी प्रकार का उपहार, उनकी सेवा, या फिर पैसा नहीं स्वीकार करना चाहिए, जिससे आपकी कवरेज पक्षपाती दिखे. मतलब कि आप पैसे लेकर खबर या फोटो / वीडियो को बायस ना करें. 
Never accept gifts, money for biasing the story or photo in Journalism.

जहां सभी के लिए जनरल उपहार हो, वहां अलग बात है, लेकिन अगर आपको विशेष ट्रीटमेंट मिल रहा है, तो यहां आप अलर्ट हो जाएं!
कहीं आपके पेशे को दागदार बनाने की कोशिश तो नहीं हो रही है?
Be alert for your journalism profession!

यह नियम आपके साथ भी लागू होता है, कि आप भी कोई इंफॉर्मेशन लेने के लिए किसी को पैसा नहीं दे सकते, किसी को रिश्वत नहीं खिला सकते. या फोटो जर्नलिज्म / पत्रकारिता के नियमों के खिलाफ है.

साथ ही आपको कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट (Conflict of Interest in Journalism) से बचना चाहिए. मतलब कि जब आप पत्रकारिता करते हैं, चाहे फुल टाइम या पार्ट टाइम, तो दूसरा ऐसा कोई कार्य न करें, जो एक दूसरे के सिद्धांतों के साथ टकराता हो.
यह बेहद आवश्यक नियम है जो आप को ध्यान में रखना चाहिए.

Press council of India rules and regulations for Journlism in Hindi.
प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के नियमों में यह भी कहा गया है कि आप को पक्षपाती (Biased Journalists) होने से बचना चाहिए!
बेशक आप किसी घटना की कवरेज कर रहे हों, तो दोनों पक्षों में से किसी का भी अनायास पक्ष ना लें. इसके अलावा अगर कोई राजनीतिक इवेंट आफ कवर कर रहे हों, उसमें आप पक्षपाती ना हों, किसी धर्म के साथ, किसी जाति के साथ, या फिर किसी व्यक्ति के साथ पक्षपात करने से बचें, और यह पत्रकारिता का मूल सिद्धांत है, जो लोगों को समझना चाहिए.
Never biased in the journalism on the basis of religion, caste, politics, ideology.

और हां आप पत्रकारिता में अकेले नहीं हैं, बल्कि दूसरे साथी भी आपके साथ कार्य करते हैं, तो दूसरे के काम का क्रेडिट लेने से आपको बचना चाहिए, क्योंकि पत्रकारिता का जुनून, हर किसी को उतना ही अधिकार देता है, और अगर दूसरा कोई व्यक्ति कार्य करता है, और उसकी क्रेडिट आप लेते हैं, तो यह पत्रकारिता के सिद्धांतों के खिलाफ माना जाता है.
Give credit to your colleague in journalism.


कुल मिलाकर आप यह समझ लें कि फोटो जर्नलिस्ट का भी एक बेहद इंपॉर्टेंट रोल है, और आजकल के डिजिटल एज में तो यह बहुत ही जरूरी हो गया है. 
एक बात आप समझ लें कि प्रिंट मीडिया के नियम फोटो जर्नलिस्ट / वीडियो जर्नलिस्ट पर जो नियम लागू होते हैं, वही डिजिटल मीडिया के लोगों पर भी लागू होते हैं. इसलिए इन तमाम चीजों का ध्यान रखें, और एक बेहतर समाज के निर्माण में अपना योगदान, एक पत्रकार के तौर पर, एक फोटो पत्रकार के तौर पर सुनिश्चित करें, और यही पत्रकारिता का धर्म है, तो यही पत्रकारों का कर्म क्षेत्र भी है.

आप इस संबंध में क्या कहते हैं, कमेंट बॉक्स में अपने विचारों से हमें अवश्य अवगत कराएं.

Press Council of India Guidelines को आप इस लिंक पर डिटेल में पढ़ सकते हैं: https://presscouncil.nic.in/OldWebsite/NORMS-2010.pdf

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.


 





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