'त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग' जो शिव को है प्रिय

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'त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग' जो शिव को है प्रिय

Trayambkeshwar Temple (Pic: youtube)


महाराष्ट्र के नासिक शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित 'त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग' मंदिर की खूबसूरती बेहद अलौकिक है। यह मंदिर गोदावरी के तट पर बना है। 

यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जहां भगवन शिव के साथ आपको ब्रह्मा और विष्णु के दर्शन भी होंगे ।और यही कारण है कि यह स्थान भगवान शिव को अत्यंत प्रिय बताया जाता है। काले रंग के पत्थर से निर्मित इस मंदिर की खूबसूरती देखते ही बनती है। वहीं, मंदिर के चारों तरफ फैली हरियाली इसे और अधिक खूबसूरत बनाती है, तो गोदावरी नदी की बहती कल-कल करती निर्मल धारा आपका मन हर प्रकार से मोह लेगी।

पौराणिक कथा

शिव पुराण में इस मंदिर को लेकर जो कहानी बताई गई है, उसके अनुसार एक बार गौतम ऋषि और उनकी पत्नी से नाराज होकर उनके आश्रम में रहने वाले अन्य ब्राह्मण भगवान गणेश की वंदना करने लगे और भगवान गणेश प्रसन्न हुए तो उन्होंने गौतम ऋषि से बदला लेने की बात कही।

भगवान गणेश ने उन ब्राह्मणों को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह गौतम ऋषि से अपनी नाराजगी का बदला लेना चाहते थे, जिस कारण भगवान गणेश को हार मानकर उनकी बात माननी ही पड़ी। अतः गौतम ऋषि से बदला लेने के लिए भगवान गणेश एक बेहद कमजोर गाय का रूप धारण कर उनके खेतों में चरने चले गए। अपने खेत में गाय को चरते देख गौतम ऋषि उसे बाहर निकालने का प्रयास करने लगे।
इसके लिए उन्होंने एक तिनके को अपने हाथ में लिया और गाय को बाहर की तरफ भगाने लगे, लेकिन जैसे ही तिनका गाय के शरीर में लगा तो वह वहीं गिर कर मर गई।
इस प्रकार छुपकर देख रहे सारे ब्राह्मण इकट्ठा हो गए और गौतम ऋषि पर गौ हत्या का दोष लगाने लगे। इसके लिए गौतम ऋषि ने उन ब्राह्मणों से क्षमा मांगी और अपने अपराध की मुक्ति की बात पूछी।

ब्राह्मणों ने बेहद कठोर उपाय बताते हुए गौतम ऋषि को कहा कि वह पूरी पृथ्वी के तीन चक्कर लगाएं और ब्रम्हगिरी पर्वत की 101 परिक्रमा करें, तब जाकर उन्हें गो हत्या के दोषों से मुक्ति मिलेगी।
अथवा गंगा जी को धरती पर लाना होगा और भगवान शिव की आराधना करनी होगी।


ब्राह्मणों द्वारा बताए गए उपायों पर गौर करते हुए गौतम ऋषि भगवान शिव की आराधना में लग गए। भगवान शिव ने गौतम ऋषि की साधना से प्रसन्न होकर दर्शन दिए। गौतम ऋषि ने भगवान शिव से गौ -हत्या के अपराध की क्षमा मांगी, तब भगवान शिव ने बताया कि आपके द्वारा गौ हत्या नहीं हुई है, बल्कि आपके आश्रम में रहने वाले ब्राह्मणों द्वारा छल किया गया है, लेकिन उन्हें इस अपराध की सजा अवश्य मिलेगी।

तब गौतम ऋषि ने प्रभु के सामने हाथ जोड़ लिए और उन ब्राह्मणों को दंड ना देने की बात कही। उन्होंने भगवान शिव से कहा कि उन ब्राह्मणों की ही वजह से मुझे साक्षात आपके दर्शन हुए हैं, इसलिए वह मेरे हितैशी हैं। गौतम ऋषि की इस बात से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने ब्रह्मगिरी पर्वत से गोदावरी नदी का उद्गम किया और सभी देवताओं के आग्रह पर वहीं विराजमान हो गए और यह मंदिर 'त्रयंबकेश्वर मंदिर' के नाम से जाना-जाने लगा।

आपको यह धार्मिक कथा कैसी लगी कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। 



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