दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारी 'एचआईवी' की वैक्सीन क्यों नहीं बन पाई अब तक?

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दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारी 'एचआईवी' की वैक्सीन क्यों नहीं बन पाई अब तक?

Know About HIV Vaccination (Pic: dnaindia)

विज्ञान कितना आगे निकल गया है इसका सहज उदहारण है इंसान का चाँद और मंगल जैसे ग्रहों तक पहुँच जाना। मेडिकल साइंस के क्षेत्र में भी इंसान ने काफी तरक्की की है जिसके चलते असाध्य से असाध्य रोगों का इलाज सम्भव हुआ है। लेकिन इतनी तरक्की के बावजूद इंसान और विज्ञान कभी -कभी मजबूर नजर आते हैं। 

इस सन्दर्भ में अगर बात करें 'एचआईवी' (Know About HIV)यानि कि एड्स की तो अभी तक इस रोग का समुचित इलाज संभव नहीं हो पाया है। इस बीमारी के बारे में साल 1980 में पता चला, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर रही थी। एचआईवी के सामने आने के बाद वैज्ञानिकों ने इसकी दवा तथा वैक्सीन की खोज करनी शुरू कर दी लेकिन अभी तक  उन्हें कोई सफलता हासिल नहीं हुई। 

हालाँकि वैज्ञानिक तो कुछ ऐसी दवा जरूर बनाई है जो एचआईवी को तो खत्म नहीं कर सकती लेकिन एचआईवी के प्रभाव को कम कर देती हैं। 

इस सब के बाद अहम् प्रश्न यह उठता है कि मेडिकल साइंस में अब तक एचआईवी की वैक्सीन क्यों नहीं बन पाई है। इसके निम्न कारणों को सझना होगा!

. एचआईवी का संक्रमण एक ऐसा संक्रमण है जिसके संपर्क में आने के बाद एक व्यक्ति की रिकवरी लगभग असंभव सी हो जाती है.

. एचआईवी का वायरस तेजी से अपना रूप बदलता है इसलिए कोई भी वैक्सीन सटीक रूप से इस पर असर नहीं कर पता है। 
. एचआईवी वायरस दूसरे वायरस की तुलना में ज्यादातर खतरनाक होते हैं जो लोगों के शरीर की इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देते हैं तथा लोगों का इम्यून सिस्टम एचआईवी वायरस से लड़ नहीं पाता है.

. एचआईवी का संक्रमण लोगों के शरीर में लंबे समय तक रहता है इसके दौरान वायरस लोगों के डीएनए में छिपा रहता है डीएनए में छिपे रहने के कारण इस वायरस को ढूंढ कर खत्म करना मुश्किल काम है.

. आमतौर पर देखा जाए तो जब कोई भी वैक्सीन का ट्रायल होता है तो सबसे पहले उस वैक्सीन का ट्रायल जानवरों पर किया जाता है उसके बाद उस वैक्सीन का ट्रायल इंसानों पर किया जाता है लेकिन एचआईवी की वैक्सीन के मामले में ऐसा नहीं है क्योंकि जानवरों को एचआईवी संक्रमण में  देखा नहीं गया ताकि उन पर कोई वैक्सीन का ट्रायल किया जाए.

. वैक्सीन उन वायरस से हमारी रक्षा करती है जो वायरस सांस या गैस्ट्रो-इंटसटाइनल सिस्टम के ज़रिए शरीर में प्रवेश करती हैं लेकिन एचआईवी (Know About HIV)के  वायरस हमारे जननांग यहां फिर खून के माध्यम से लोगों के शरीर में प्रवेश करते हैं.

Know About HIV(Pic: globaltimes)

यह सच है कि एचआईवी की वैक्सीन अभी तक बन नहीं पाई है लेकिन यदि हम कुछ सावधानियां अपने जीवन में  बरतें तो हम एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी से बच सकते हैं. जिसमें असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाने से बचना, इस्तेमाल की हुई सूई और सीरिंज का इस्तेमाल नहीं करना प्रमुख है। 

आपको बता दें कि पूरे विश्व में 18 मई को एचआईवी दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों को एचआईवी के बारे में जागरूक कर सकें और लोग एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रह सकें.

आशा करता हूं कि हमारी यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी और एचआईवी और एचआईवी की वैक्सीन के बारे में आपको शुरूआती जानकारी मिली होगी. कमेन्ट बॉक्स में अपनी राय अवश्य दें.

-टीम आर्टिकल पीडिया


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