प्रथम 'ज्योतिर्लिंग' काशी विश्वनाथ की कहानी

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प्रथम 'ज्योतिर्लिंग' काशी विश्वनाथ की कहानी


Kashi Vishwanath Temple
Kashi Vishwanath Temple

दुनिया का पहला ऐसा मंदिर जहाँ 'शिव और शक्ति' एक साथ विराज हैं और माँ गंगा की कल -कल करती अविरल धारा जिनका पांव पखारती है। जी हां! हम बात कर रहे 'काशी विश्वनाथ मंदिर' के बारे में  जिसका इतिहास अनादि काल से माना जाता है।
कशी विश्वनाथ मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रमुख है क्योंकि यह प्रथम लिंग माना जाता है।  शिव और शक्ति के संयुक्त रूप वाले इस  धाम को मुक्ति का 'द्वार' बताया जाता है।

इस मंदिर को लेकर एक और बात प्रचलित है कि मंदिर के तट पर बहती पवित्र गंगा नदी में स्नान करने के बाद अगर बाबा विश्वनाथ के दर्शन किया जाएँ तो इंसान को मुक्ति मिल जाती है। विश्वनाथ मंदिर के बारे में एक बात और प्रचलित है कि मंदिर के गर्भगृह में स्थित ज्योतिर्लिंग ईशान कोण में स्थापित है लेकिन मूर्तियों का श्रृंगार होता है तो सभी मूर्तियों का मुख पश्चिम दिशा की तरफ रहता है। यह मंदिर  लगभग 3,500 साल पुराना है और महाराजा रणजीत सिंह ने इस मंदिर के गुम्बद पर सोने की चादर चढ़वायी थी। मंदिर में स्थापित शिवलिंग चिकने काले पत्थर से बना हुआ है। 

इस मंदिर के महत्ता की बात करें तो कई मुग़ल शासक जिसमें 1194 ईस्वी में मोहम्मद गौरी तो 1447 ईस्वी में जौनपुर के मोहम्मद शाह नामक सुल्तान ने इसको तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन अपने मकसद कभी कामयाब नहीं हो पाए। इतना ही नहीं शाहजहां ने भी 1632 ईस्वी में बाबा विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने की कोशिश की जिसके लिए विशाल मुग़ल सेना भी भेजी थी लेकिन मुग़ल सेना विश्वनाथ के मुख्य मंदिर को भी तोड़ नहीं पाई थी। 

इसके बाद औरंगजेब ने 1669 ईस्वी में कशी विश्वनाथ मंदिर तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद बनाने का निर्देश जारी किया। साथ ही कशी के हजारों ब्राह्मणों को धर्म परिवर्तित कर मुसलमान बनाने का आदेश भी दिया। लेकीन बाबा की महिमा ऐसी अपरम्पार थी कि इतने दुराचार सहने के बाद भी मंदिर की महिमा कम नहीं हुई और राजा टोडरमल जैसे महान व्यक्तियों ने इसके पुनरुद्धार का कार्य किया। इसके आलावा अहिल्याबाई होल्कर और महाराणा रंजीत सिंह जैसे शासकों ने भी इस मंदिर के पुनः निर्माण में अहम् भूमिका निभाई। 
भारत के इन महान लोगों की मेहनत बेकार नहीं गयी और विश्वनाथ मंदिर उसी शानो-शौकत के साथ खड़ा है। 

आपको यह लेख कैसा लगा? मंदिर के इस सीरीज में हम जल्दी ही किसी भव्य मंदिर की कहानी ले कर आएंगे। 




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