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महाभारत काल के जीवित 7 योद्धाओं को जानते हैं आप?


Living Warriors of Mahabharata Age, Hindi Article


अश्वत्थामा 

महाभारत काल के जीवित लोगों में सबसे पहला नाम आता है अश्वत्थामा का. 
इससे सभी लोग परिचित ही हैं. कहा जाता है कि इस अजेय योद्धा को अमरत्व का वरदान मिला था, किंतु पांडवों के वंश का नाश करने के अपराध में भगवान श्री कृष्ण ने अश्वत्थामा को कलयुग के अंत तक पीड़ा भुगतने का श्राप दिया था.

अश्वत्थामा की वीरता के बारे में किसी को कोई संदेह नहीं था. यह अकेला ऐसा योद्धा था जो कौरव पक्ष के हार जाने के पश्चात भी रणभूमि में पांडवों के खिलाफ लड़ता रहा.

कृपाचार्य 

महर्षि गौतम के पुत्र, कुरुवंश के कुलगुरु और अश्वत्थामा के मामा कृपाचार्य भी जीवित माने जाते हैं, क्योंकि महाभारत में इनका वध संभव ना हो सका था. इनको सात चिरंजीवियों में स्थान मिला है.

जामवंत 

हालांकि जामवंत भगवान राम के युग से ही जीवित माने जाते हैं और द्वापर युग में इनकी पुत्र जामवंती से भगवान श्री कृष्ण ने विवाह किया था. विवाह से पूर्व दोनों में स्यन्तक मणि के लिए भयंकर युद्ध भी हुआ था/

बहुत कम लोगों को पता होगा कि जामवंती और श्री कृष्ण के संयोग से सांब नामक पुत्र प्राप्त हुआ था और इसी के कारण कृष्ण के वंश का विनाश भी हुआ था.
हालांकि माना जाता है कि जामवंत आज भी जीवित हैं.

महर्षि दुर्वासा 

महर्षि दुर्वासा भी त्रेता युग के ऋषि थे, जिन्होंने रघुवंश के बारे में तमाम भविष्यवाणी की थीं. महाभारत काल में इन्हीं दुर्वासा ऋषि ने कुंती को एक मंत्र दिया था और उसी मंत्र से पांडवों की उत्पत्ति हुई थी. 

अमर होने का वरदान दुर्वासा ऋषि को भी प्राप्त है और महाभारत काल में इनका कई जगह पर प्रसंग आता है.

भगवान परशुराम 

जी हां! भगवान परशुराम भी त्रेता युग से द्वापर युग में आए और माना जाता है कि यह आज तक जीवित हैं. रामायण काल में जहां इनका वर्णन लक्ष्मण के साथ शिव धनुष तोड़े जाने पर विवाद के दौरान किया गया है, तो महाभारत काल में यह भीष्म और कर्ण के गुरु के रूप में प्रख्यात हुए.

महर्षि वेदव्यास 

महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास भी जीवित माने जाते हैं. संपूर्ण महाभारत में इनका सक्रिय रोल भी काफी महत्वपूर्ण है और ऐसा माना जाता है कि यह समय के अंत तक जीवित रहने वाले हैं.

बजरंग बली

कौन नहीं जानता है कि भगवान राम के परम भक्त बजरंगबली को चारों युगों में जीवित रहने का आशीर्वाद स्वयं श्री राम ने दिया था.

महाभारत काल में भी इनका अहम रोल है और अर्जुन के रथ पर पूरे युद्ध में यह स्वयं विराजमान थे, जिसके कारण धर्म की विजय संभव हो सकी थी.

इन छह योद्धाओं के अलावा मयासुर का जिक्र भी आता है जो त्रेता युग में रावण के ससुर थे और महाभारत में जिन्होंने युधिष्ठिर के लिए माया भवन का निर्माण किया था.
इसके अलावा ऋषि मार्कंडेय का भी जिक्र आता है, जिन्होंने वनवास के समय धर्मराज युधिष्ठिर को रामायण सुना कर धैर्य धारण करने की शिक्षा दी थी.

महाभारत चिरकाल तक अमर रहने वाला शास्त्र है और इससे हमें उसी मात्रा में शिक्षा भी मिलती रही है.
कमेंट बॉक्स में अपने विचार, अपने अनुभव अवश्य ही शेयर करें.



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