सार्वजनिक अश्लीलता: क्या कहता है भारतीय कानून?

भारत जैसे देश में सार्वजनिक स्थान पर अश्लीलता हमारे समाज में अनैतिक तो मानी जाती हैं, किन्तु क्या यह गैरकानूनी भी हैं?

निश्चित तौर पर इस तरह के प्रश्न कइयों के मन में उठते होंगे, तो आइये इस लेख में इस पर नज़र दौड़ाते हैं।

Indecency at Public Places (Pic: thebridalbox)

पब्लिक प्लेसेज पर प्रेम प्रदर्शन को लेकर आप कई खबरें देख चुके होंगे। यहाँ तक कि पार्क इत्यादि दूसरी सार्वजनिक जगहों पर आपने प्रेमी-प्रेमिकाओं को एक दूसरे को अश्लील तरीके से छूते भी देखा होगा। इस तरह के कृत्यों पर कई सामाजिक संगठनों की भृकुटियाँ तन जाती हैं और वह मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। उनका तर्क होता है कि इस तरह सार्वजनिक अश्लील हरकतों से भारत की संस्कृति पर बुरा प्रभाव पड़ता है और इसके लिए कानून को सख्त होना चाहिए।

इस क्रम में आप को बता दें कि कानून की नज़र में पब्लिक प्लेसेज पर अश्लीलता आलरेडी अपराध माना गया है। जी हाँ, भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के तहत किसी भी सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करने या उसमें शामिल व्यक्ति को दंडित कि जा सकता है। बता दें कि इसमें अश्लील इशारे और बोले जाने वाले शब्द / फब्तियां आदि भी शामिल हैं!

इन सार्वजनिक जगहों में बेशक वह पार्क हो, कोई स्कूल या कॉलेज हो या फिर हॉस्पिटल हो, मंदिर, सिनेमाघर, चौक-चौराहा आदि जैसा कोई भी ऐसा स्थान हो जहाँ पब्लिक की आवाजाही होती हो। हालाँकि, 2016 में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा यह कहा गया था कि यह कानून निजी जगहों पर लागू नहीं होता है।
यह बात भी समझने लायक है कि अश्लीलता का आरोप किसी पर तब ही लगाया जाता है, जब इससे चरित्रहीनता का प्रदर्शन हो या जनता को परेशानी हो, इसमें किसी शादीशुदा जोड़े द्वारा सामान्य रूप से प्रेम जतलाने को अपराध नहीं माना गया है।

मतलब साफ़ है कि अगर आप व्यस्क हैं और अपनी मर्जी से कहीं, किसी निजी जगह पर संबंध बनाते हैं तो कानून आपको दोषी नहीं ठहराता है, किन्तु अगर आप सार्वजनिक जगहों पर अपने काम-वासना की पूर्ती करते हैं तो भारतीय कानून के अंतर्गत आपको तीन महीने तक की सजा हो सकती है।

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Web Title: Indecency at Public Places, Indian Law in Hindi

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