कैसे बन सकते हैं स्टार्टअप को फाउंडर? जाने महत्वपूर्ण खूबियां

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कैसे बन सकते हैं स्टार्टअप को फाउंडर? जाने महत्वपूर्ण खूबियां

  • अगर सभी को फाउंडर्स के उद्देश्य - वैल्यूज शेयर्ड होते हैं, तो फिर बड़े कानफ्लिक्ट होने की गुंजाइश नहीं रहती है. इसलिए बहुत जरूरी है कि आप विजन को - वैल्यूज को समझकर ही जुड़ें. 
  • अगर आप महत्वकांक्षी नहीं हैं, तो आप स्टार्टअप के लिए फिट नहीं हैं, और अगर आप अपनी महत्वाकांक्षा के साथ-साथ विश्वसनीयता बरकरार नहीं रख पाते हैं, तो कहीं ना कहीं आपकी स्टार्टअप की सक्सेज में मुसीबत आने वाली है. 
  • ध्यान रखिए, आपकी गलती पर टोकाटाकी हो, तो आप इगोइस्ट ना हो जायें, बल्कि व्यवहारिक बने रहें, विनम्र बने रहें और सबसे महत्वपूर्ण ऑटो करेक्शन में देर न करें.
Being a Startup Co Founder, Hindi Article

लेखकमिथिलेश कुमार सिंहनई दिल्ली 
Published on 20 Jun 2021 (Update: 20 Jun 2021, 9:55 PM IST)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी हाल ही की अपनी डेनमार्क यात्रा में इस बात को बड़े जोर देकर कहा है कि 2014 से पहले भारत में 300 से 400 स्टार्टअप ही थे, तो अब 65 हजार से अधिक स्टार्टअप भारत में सक्रिय हैं. ऐसे में आसानी से समझा जा सकता है कि हाल के दिनों में ग्रोथ का रेशियो क्या रहा है! आगे उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज भारत यूनिकॉर्न्स के मामले में दुनिया में नंबर-3 पर हैं, तो स्टार्ट अप्स के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम हिंदुस्तान है.

यह वास्तविकता है कि दुनिया के साथ-साथ भारत में भी स्टार्टअप का चलन बेहद तेजी से आगे बढ़ा है. अगर इसे बिजली की रफ्तार की संज्ञा दी जाए, तो कोई अतिशयोक्ति न होगी!

स्टार्टअप का आसानी से मतलब समझाया जाए तो वह यह है कि लोगों की प्रॉब्लम को बेहतरीन ढंग से समझ कर, उस पर ऐसा सलूशन बनाया जाए, जो लोगों की प्रॉब्लम को वास्तविक रूप से हल करता ही हो, साथ ही साथ व्यापारिक दृष्टि से भी अति लाभकारी हो. जब लोगों की प्रॉब्लम सॉल्व करने के लिए स्टार्टअप्स के को फाउंडर्स, टेक्नोलॉजी की सहायता से, बिजनेस कैलकुलेशन की सहायता से तेज गति से आगे बढ़ते हैं, तो इसके बड़े बिजनेस वेंचर में कन्वर्ट होने की संभावना बढ़ जाती है, वह भी बेहद तीव्र गति से!

अब सवाल यह उठता है कि स्टार्टअप की इस रेस में आप किस प्रकार से अपना योगदान दे सकते हैं? आपके पास भी बहुत सारी स्किल्स होंगी, कई आइडियाज होंगे, उन आइडियाज के बल पर आप मार्केट से फंडिंग उठाने की भी काबिलियत रखते होंगे, लेकिन इन सबके बावजूद एक और बेहद महत्वपूर्ण चीज है, और वह है को फाउंडर्स!
जी हां! अनुमान के मुताबिक 90% से अधिक स्टार्टअप्स में आपक एक से अधिक को फाउंडर मिलेंगे, जो एक दूसरे की काबिलियत का बेहतर इस्तेमाल करते हुए स्टार्टअप को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यह भी एक हिडेन फैक्ट है कि इन्वेस्टर भी उन्हीं स्टार्टअप्स में पैसा लगाना पसंद करते हैं, जहाँ एक से अधिक को-फाउंडर मौजूद हों!

ऐसे में बेशक आप एक लीडर के तौर पर अपना स्टार्टअप करें, या फिर किसी साथी लीडर द्वारा किए गए स्टार्टअप में को-फाउंडर के तौर पर जुड़ना चाहें, आपके अंदर कुछ महत्वपूर्ण खूबियों का होना बेहद आवश्यक है, आइए देखते हैं...

साझा उद्देश्य एवं साझा मूल्य (Shared Vision & Values)

जी हां! किसी भी स्टार्टअप में एक को फाउंडर के तौर पर जुड़ने के लिए या जोड़ने के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण चीज है, वह यह है कि क्या आप स्टार्टअप के उद्देश्यों को - मूल्यों को समझते हुए उसके साथ जुड़ पा रहे हैं? कल्पना कीजिए कि आपके दूसरे साथी को फाउंडर का मकसद है सिर्फ पैसा कमाना और अगर आपका मकसद है कि पैसा कमाने के साथ-साथ लोगों की लाइफ को भी बेहतर बनाना चाहिए, उनकी प्रॉब्लम सॉल्व करना चाहिए, तो यहां बारीक अंतर आ जाता है. ध्यान रहे, अगर सभी को फाउंडर्स के उद्देश्य-वैल्यूज शेयर्ड होते हैं, तो फिर बड़े कानफ्लिक्ट होने की गुंजाइश नहीं रहती है. इसलिए बहुत जरूरी है कि आप विजन को - वैल्यूज को समझकर ही जुड़ें.


जुनून एवं उद्यमिता (Passion and Entrepreneurial Mindset)

यह ध्यान रख लीजिए कि स्टार्टअप का मतलब कोई सामान्य दुकान खोलना, अथवा कोई सामान्य बिजनेस करना नहीं है, जैसा कि ट्रेडिशनल रूप से किया जाता रहा है. वास्तव में स्टार्टअप का मतलब है, बेहद तेज गति से, बल्कि ऊपर बताया गया है कि बिजली की गति से आगे बढ़ने की क्षमता आपके भीतर होना अनिवार्य है. लिंक्डइन के को-फाउंडर रीड हाफमैन ने इसके ऊपर एक ब्लिट्जस्केलिंग (Blitzscaling) किताब लिखी है, जिसमें स्पीड को प्रायोरिटी पर रखने का स्पष्ट सन्देश है.

ब्लिट्जस्केलिंग को इस बात से ही समझ लीजिए कि अगर आप बिजली की गति से नहीं चलते हैं, तो आप पेनफुल डेथ की तरफ बढ़ जाएंगे.

इसलिए एक को फाउंडर के तौर पर क्या आपके अंदर इस स्तर का जुनून है जो तेज गति से आगे बढ़ सके, और एक उद्यमिता माइंडसेट के साथ निश्चित उद्देश्यों को प्राप्त कर सके.

तार्किक एवं वास्तविकता से तालमेल (Logical & Reality-Oriented)

एक को फाउंडर के तौर पर आपको लॉजिकल रहना है. मतलब आपके निर्णय तर्क की कसौटी पर खरे उतरने चाहिए, और इसका मतलब यह भी नहीं है कि आप तर्क के बल पर आसमानी ख्याल ही पकाने लगें. यहाँ धरातल पर आपके पैर जमे रहना चाहिए. 

इस सम्बन्ध में एक छोटी कहानी याद आती है, जो बचपन में सुनी थी. यह एक विद्वान पंडित के बारे में है, जो हर चीज सोच समझकर-कैलकुलेट करके करते थे. एक बार उन्हें नदी पार करना था, किन्तु उन्हें तैरना न आता था. ऐसे में वह नदी की गहराई का एवरेज निकालने लगे कि किनारे पर कम गहराई है, तो अगर बीच में अधिक गहराई भी हुई तो औसत गहराई फिर भी इतनी नहीं है कि नदी को चल कर पार न किया जा सके. फिर नतीजा वही हुआ, जो आप सोच रहे हैं ... जी हाँ! पंडित जी डूब गए!

इस छोटी कथा से हमें वास्तविकताओं को ध्यान में रखने की प्रेरणा मिलती है, हालाँकि इसका यह अर्थ भी नहीं है कि कैलकुलेशन नहीं करना है, बल्कि इसके बिना तो आप स्टार्टअप की दुनिया में चलने की सोच भी नहीं सकते!
ऐसे में एक को-फाउंडर के तौर पर जो आप सोचते हैं, जो आप करने जा रहे हैं, वह वास्तविकता के कितने नजदीक है. जो भी एक्शन ले रहे हैं, उसके परिणाम क्या होने वाले हैं, और उस परिणाम को किस प्रकार आप बुद्धिमता से हैंडल कर पाएंगे. 

इन सब के बीच में आपको तेज ग्रोथ भी करनी है. ऐसे में एक को फाउंडर के तौर पर क्या इन चीजों को संभालने के लिए आपके पास धैर्य है, इस बात का विचार आप अवश्य करें.

महत्वकांक्षा एवं विश्वसनीयता (Ambition & Credibility)

कई लोगों को यह दोनों बातें अलग लग सकती हैं. कई बार तो यह एक दूसरे का जबरदस्त विरोध भी करती हैं, लेकिन एक स्टार्टअप को-फाउंडर के तौर पर आपको अपनी महत्वाकांक्षा और अपनी विश्वसनीयता में तालमेल बनाकर रखना पड़ेगा. अगर आप महत्वकांक्षी नहीं हैं, तो आप स्टार्टअप के लिए फिट नहीं हैं, और अगर आप अपनी महत्वाकांक्षा के साथ-साथ विश्वसनीयता बरकरार नहीं रख पाते हैं, तो कहीं ना कहीं आपकी स्टार्टअप की सक्सेज में मुसीबत आने वाली है. 

इन दोनों का कॉम्बिनेशन तब बनता है, जब आप अपने टास्क एवं रिस्पांसिबिलिटी को एक बड़े परिदृश्य में समझते हुए पूरा करते हैं. ऐसे में आप अपनी सोच को, अपने स्टार्टअप के माध्यम से लार्ज स्केल पर ले जाने की महत्वपूर्ण भूमिका आसानी से निभा ले जाते हैं.

सुधार के लिए तत्पर (Auto Correction)

जी हां! अधिकतर गुणों से संपन्न और तेज दिमाग लोगों की यह खासियत होती है कि उन्हें अपनी गलती नजर नहीं आती है. अगर वह गलती देख भी लें, तो वह सुधार के लिए जल्दी तत्पर नहीं होते हैं. खासकर तब, जब उनकी गलती को कोई और उन्हें बताए. यह बेहद मुश्किल सिचुएशन होती है, लेकिन दुनिया में ऐसा कौन सा व्यक्ति है, जिसके अंदर सुधार की गुंजाइश ना हो? उसे विनम्रता से स्वीकार करते हुए, ऑटो करेक्ट करना ही एक बेहतरीन को फाउंडर के तौर पर आपको स्थापित करता है.

ध्यान रखिए, आपकी गलती पर टोकाटाकी हो, तो आप इगोइस्ट ना हो जायें, बल्कि व्यवहारिक बने रहें, विनम्र बने रहें और सबसे महत्वपूर्ण ऑटो करेक्शन में देर न करें.

टीम प्लेयर (Team Player)

आज के बिजनेस की यह बेहद वास्तविक बात है. अगर आप एक टीम प्लेयर नहीं हैं, अपनी टीम को टीम स्पिरिट के माध्यम से मोटिवेट नहीं कर सकते, अपनी टीम के साथ अपने विजन को - वैल्यूज को शेयर करते हुए उन्हें लीड नहीं कर पाते, तो कहीं ना कहीं आप फंसने वाले हैं. छोटी छोटी खुशियों की जो भी अचीवमेंट होती है, उसका क्रेडिट आप अपनी टीम के प्रत्येक प्लेयर को वास्तविक रूप से कितना दे पाते हैं, यह आपको काफी मजबूत बनाएगा. 

एक को-फाउंडर का रोल यह भी होता है कि प्रतियोगी माहौल बनाए रखते हुए टीम के बीच में एक बेहतरीन बॉन्ड विकसित करने का कार्य करते चलें. ऐसे में आपको बॉस की बजाय एक लीडर के तौर पर बिहेव करना होता है, तभी टीम आप पर विश्वास कर पाती है.

स्वतंत्र विचारक एवं कम्युनिकेटिव (Independent Thinker & Communicative)

बेहद आवश्यक है कि आप अपने विचारों को धार देते हुए उसके पॉजिटिव - नेगेटिव पहलुओं को सोच सकें. अगर आप विचार नहीं कर सकते, स्वतंत्र सोच विकसित नहीं कर पाते, तो आप एक बॉक्स में खुद को बांध लेंगे. और ऐसे में डेवलपमेंट होना बहुत कठिन हो जाता है, इसीलिए अपनी सोच को स्वतंत्र रखें, और दूसरे को-फाउंडर्स के साथ भी उसे साझा करें. 

इसी प्रकार से आप को अन्य कलिग के साथ-साथ भिन्न मीटिंग में क्लाइंट के साथ भी अपने विचारों को समय-समय पर साझा करते रहने की जरूरत है. यह ओपन माइंड से होना आवश्यक है, इसीलिए इंडिपेंडेंट थिंकर होने के साथ-साथ आपको कम्युनिकेशन में माहिर होना बहुत जरूरी है, बल्कि कई बार तो आपके लिए प्रो-एक्टिव कम्युनिकेशन बेहद आवश्यक होता है.

सेल्फ डेवलपमेंट (Self Development)

कोई कितना भी तेज दिमाग का व्यक्ति हो, अगर वह सेल्फ डेवलपमेंट पर ध्यान नहीं देता है, तो जल्द ही वह पुराना पड़ जाता है, और वह कॉम्पिटेटिव भी नहीं रह पाता. टीम को लीड करने की हालत में भी नहीं रह पाता और स्टार्टअप में ऐसी स्थिति किसी भी को फाउंडर के लिए घातक है. इसीलिए सेल्फ डेवलपमेंट के लिए आवश्यक कोर्सेज के साथ-साथ किताबों को पढ़ना, अपने फील्ड में रिसर्च करना, रेलेवेंट लोगों से लगातार बातें करना, और उन बातों का नोट बनाकर अपनाई जा सकने वाली बातों को अपनाना, एक बेहतरीन को फाउंडर का मुख्य गुण होता है.

इसमें टेक्नोलॉजी से लेकर बिजनेस, राजनीतिक एंगल और दूसरे पक्षों को समझना और उन पर व्यापक दृष्टिकोण रखते हुए व्यवहारिक नजरिया अपनाना एक को फाउंडर को काफी मदद करता है.

जब आप इन तमाम क्षेत्रों के बारे में अवेयर रहते हैं, अपने आप को इनमें सहजता से प्रस्तुत करते हैं, तो कहीं ना कहीं कठिनाई आसान होने लगती है, क्योंकि बदलते माहौल में अगर आपको तीव्र गति से बढ़ना है, तो इसके लिए आवश्यक है कि सेल्फ डेवलपमेंट के लिए - सेल्फ अवेयरनेस के लिए आप सजग रहें.

उपरोक्त बातों को पढने के बाद क्या कहते हैं आप?

निश्चित रूप से इन गुणों के साथ आप आधुनिक समय में एक बेहतरीन को फाउंडर बन सकते हैं. कमेंट बॉक्स में अपने विचारों से हमें अवश्य ही अवगत कराइए.








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