बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए क्या करें?

अगर कहा जाए कि सही तरीके से जीवन जीने के लिए आत्मविश्वास होना बेहद जरूरी है तो यह 100 फीसदी सही बात होगी। आप चाहे जो भी कार्य करें... अगर आपके अंदर आत्मविश्वास की कमी है तो उस कार्य में सफल होने के चांसेज भी उतने ही कम होंगे। वहीं अगर आप सफल हो भी जाते हैं तो उसकी सफलता आपको संतुष्ट नहीं कर पाती है।

समझने वाली बात यह भी है कि आत्मविश्वास जितना बड़े लोगों के लिए आवश्यक है उतना ही छोटे बच्चों के लिए भी आवश्यक है।

Self Confidence Tips in Children (Pic: revolutionmath)

आजकल के कंपटीशन वाले माहौल में जहां बचपन से ही एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी है, वहां अगर आपके बच्चे के अंदर आत्मविश्वास की जरा भी कमी हुई तो वह इन हालातों से लड़ने में कमजोर पड़ सकता है।

यहाँ हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे जिनकी मदद से आप अपने बच्चे में आत्मविश्वास को कायम रख सकेंगे।

पहले स्वयं को बदलें!

बच्चे की प्रथम पाठशाला उसका घर होता है।
वह अपने घर में जिस तरीके का माहौल पाता है, उसके चरित्र का निर्माण धीरे-धीरे उसी प्रकार से होने लगता है। ऐसे में अगर आप अपने बच्चे के अंदर आत्मविश्वास को जगाना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने घर के माहौल को बेहतर बनाएं। बच्चा अगर अपने घर में अच्छे माहौल को पाएगा निसंदेह उसका आत्मविश्वास बेहतर होगा।

वहीं अगर वह अपने घर में रोज रोज लड़ाई-झगड़े और क्लेश को देखेगा तो आप उसे चाहे कितनी अच्छी बातें सिखा लें, उसका आत्मविश्वास कमजोर हो जाएगा।

ध्यान यह भी रहे कि इस प्रक्रिया में थोड़ा समय जरूर लगेगा इसलिए संयम को बनाये रखें। आत्मविश्वास कोई एक दिन में आने वाली चीज नहीं है... बल्कि यह लंबी और रोज अपनाई जाने वाली प्रक्रिया है।

इसीलिए इसके लिए आप धैर्य के साथ धीरे-धीरे अपने बच्चों को प्रेरित करें।

बच्चों के लिए अलग से समय निकालें 

जिस प्रकार से आप अपने दूसरे जरूरी कामों के लिए एक निश्चित दिनचर्या बना कर रखते हैं और उसी शेड्यूल को फॉलो करते हैं ठीक उसी प्रकार अपने बच्चों के लिए भी आप अलग से समय निकालें। जब आप अपने बच्चे के लिए समय निकालेंगे तो इस दौरान आप बेहतर समझ पाएंगे कि आपका बच्चा आखिर क्या सोचता है और उसके मन में क्या है?

एक बार अगर आप अपने बच्चों के मनोभावों को समझने लगेंगे तो आपको काफी सहूलियत मिलेगी उसके डेवलपमेंट और आत्मविश्वास-विकास के सम्बन्ध में।

बच्चों को खुद फैसला लेने के लिए प्रेरित करें 
उसके कार्यों की प्रशंसा करें 

यहां हम यह तो नहीं कहेंगे कि आप अपने बच्चे को सारे फैसले खुद लेने दें, लेकिन छोटे-मोटे कार्यों के बारे में उन्हें खुद से डिसीजन लेने दें। ऐसे में वह चाहे अच्छा करे या बुरा करे या फिर उसमें फेल हो जाए, उसके किए गए कार्यों की सावधानी पूर्वक सराहना करें, बगैर झूठी तारीफ़ किये।

एक बार अगर आप यह आदत डाल लेंगे तो आप देखेंगे कि आपके बच्चे के अंदर धीरे-धीरे आत्मविश्वास का विकास हो रहा है।

अगर आपका बच्चा कुछ गलत करता है तो आप उसे किसी और माध्यम से समझाएं ना कि तुरंत ही उसके कार्य की विस्तृत समीक्षा कर उसके उत्साह को कम कर दें!

'ओवरप्रोटेक्टिव' होने से बचें

हर मां-बाप चाहते हैं कि उनके बच्चे के ऊपर कोई आंच ना आने पाए, लेकिन अगर हर वक्त अपने बच्चे को पल्लू में छुपा कर रखेंगे तो वह फिर दुनिया के तकलीफों को समझ नहीं पाएगा!
इसीलिए छोटी मोटी समस्याओं का सामना उसे खुद करने दें। जब वह विपरीत परिस्थितियों का सामना करेगा तो अपने अनुभव के आधार पर दुनिया को जानेगा।

हाँ आपको उसके नकारात्मक विचारों पर पैनी नजर रखने की आवश्यकता है और उसे सकारात्मक चीजों की तरफ मोड़ने का सजगता से प्रयास करें।

संवेदनशील बनाएं

संवेदना ऐसी चीज है जो अगर किसी इंसान में ना हो तो वह पत्थर के समान हो जाता है। अगर कोई व्यक्ति किसी और की तकलीफ को नहीं समझ पा रहा है तो यह बहुत ही मुश्किल भरी बात है! आप अपने बच्चों के अंदर बचपन से ही इमोशंस को जिंदा रखें। उन्हें बताएं कि जिस तरीके से चोट लगने पर उसे तकलीफ होती है, ठीक उसी तरीके से सामने वाले को भी नुकसान पहुंचाने पर तकलीफ होगी।

जानवरों के प्रति, छोटे बच्चों के प्रति और असहायों  के प्रति, बूढ़ों के प्रति अपने बच्चों के अंदर इमोशंस डालें। अगर आपका बच्चा इमोशनल रहेगा तो निसंदेह दूसरों का ख्याल रखना सीखेगा।

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