घर खरीदने जा रहे हैं, तो जानिए इन 'हिडेन एक्सपेंसेज' को!

घर खरीदना आम आदमी का एक सपना होता है। यूं भी घर खरीदते समय एक व्यक्ति जितना खुश होता है उतना खुश और गौरवान्वित वह जिंदगी में बहुत कम ही अवसरों पर होता होगा। आखिर यह ऐसा फाइनेंशियल डिसीजन है जो कईयों की जिंदगी में एकाध बार ही आता है।

घर खरीदने के लिए लोग जीवन भर पूंजी जमा करते हैं और तब जाकर यह बड़ा निर्णय लेते हैं। परंतु घर खरीदते समय अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि उन्होंने सेलर को पैसा देकर अपने कार्य से मुक्ति पा ली है, पर सिर्फ विक्रेता को ही पैसा देना पर्याप्त नहीं होता है, बल्कि घर खरीदने के वक़्त कुछ ऐसी 'हिडन कॉस्ट' भी होती हैं जिसकी अनदेखी आप को नहीं करनी चाहिए।

Hidden Cost in Property Purchase (Pic: finance-monthly)


चूंकि ऐसा करने पर ऐन मौके पर आपके लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। वैसे भी घर खरीदने में अधिकांश व्यक्ति अपनी जमा-पूँजी झोंक देते हैं और अगर ठीक रजिस्ट्री के दिन आपको कुछ और कॉस्ट की पता चले, तो आपके पांवों तले ज़मीन खिसकना लाजमी है!

रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प ड्यूटी

इनमें से सबसे पहला नंबर आता है रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प ड्यूटी का। जब भी आप घर खरीदते हैं तब आपको टोटल अमाउंट का कुछ हिस्सा गवर्नमेंट को टैक्स के रूप में देना पड़ता है। स्टांप ड्यूटी का चार्ज कुल प्रॉपर्टी अमाउंट का 5%, 6% और 7% होता है।

अगर प्रॉपर्टी किसी महिला के नाम रजिस्टर हो रही है तब स्टांप ड्यूटी का 5%, अगर महिला और पुरुष दोनों के नाम रजिस्टर हो रही है तो यह 6% और अगर पुरुष अपने नाम से प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन कराता है तो ड्यूटी शुल्क 7% होता है। हालांकि यह विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग भी हो सकती है। 

इस खर्च के अलावा कुल प्रॉपर्टी अमाउंट का 1% या 2% रजिस्ट्रेशन फीस भी आपको पे करनी पड़ सकती है। कहने को यह बेहद छोटे परसेंटेज हैं, लेकिन कल्पना कीजिए कि अगर आप 5000000 (पचास लाख) की कोई प्रॉपर्टी ले रहे हैं और उस पर 5% आपको अचानक से टैक्स देना पड़ेगा तो यह तकरीबन ढाई लाख के आसपास खर्च आएगा। अगर आपको पहले से जानकारी है तो आप कहीं न कहीं से इसका बंदोबस्त ज़रूर कर लेंगे, इसलिए पहले से इसके जानकारी रखना ज़रूरी है।

मेंटेनेंस डिपॉजिट

जब भी आप कोई प्रॉपर्टी परचेज करते हैं तो जनरली मेंटेनेंस डिपॉजिट एडवांस में ही बिल्डर द्वारा चार्ज किया जाता है। नई सोसायटी पर यह खासतौर पर अप्लाई होता है। जबकि जो एक्जिस्टिंग सोसाइटीज है वहां सोसायटी के सदस्यों/ रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा चार्ज किया जाता है। मेंटिनेंस डिपॉजिट में कॉमन जगहों जैसे गार्डन, क्लब-हाउस, लाइट, सुरक्षा, पानी, स्विमिंग पूल इत्यादि के खर्चे कवर किए जाते हैं।

पार्किंग चार्जेज 

सामान्य तौर पर पार्किंग चार्ज भी घर के खर्च में नहीं जोड़ा जाता है और अगर आप पार्किंग परचेज़ करना चाहते हैं तो इसके लिए कई जगहों पर एक्स्ट्रा चार्ज आपको पे करना होता है। वहीं अगर आप पार्किंग नहीं लेते हैं, तब विक्रेता आपके पार्किंग स्पेस को किसी दूसरे को बेच सकता है। इस सम्बन्ध में वर्तमान में आपके पास बेशक गाड़ी न हो, लेकिन अगले 10 साल की ज़रूरतों के हिसाब से आपको पार्किंग लेने या न लेने का फैसला करना चाहिए, ताकि बाद में आपको इसकी वजह से दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

इसके अलावा अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर सर्विस टैक्स लगता है, तो कई जगह आपको अपनी मनपसंद का फ्लैट लेने के लिए प्रेफरेंशियल लोकेशन चार्ज भी देना पड़ता है। इसका मतलब यह है कि जो फ्लैट या जो लोकेशन सर्वाधिक डिमांड में होती है सामान्य तौर पर बिल्डर उसकी कीमत बढ़ाकर लेते हैं। 

इसके अतिरिक्त, कई जगहों पर सेलर अपना कमीशन अलग से रखता है।

जाहिर तौर पर यह सारी एडीशनल कॉस्ट ऐन वक्त पर आपका बजट बिगाड़ सकती हैं, इसीलिए इन सब की जानकारी शुरू से रखें और उस हिसाब से अपने बजट को भी मेंटेन करके चलें, ताकि आपके सपनों का घर लेने का ख्वाब अधूरा ना रह जाए।

अगर आपने पहले से घर ले रखा है और इस लेख को पढ़ रहे हैं तो अगर आपने और भी कोई हिडेन कॉस्ट अनुभव किया है तो कमेंट-बॉक्स में उसे ज़रूर ही बताएं!

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Web Title: Hidden Cost in Property Purchase, Real Estate Article in Hindi


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