सरकारी अधिकारियों द्वारा झूठी सूचना: क्या कहता है कानून?

Article 177 in Indian Law (Pic: psychcentral)

झूठी सूचना देने पर हमारे भारतीय कानून में धारा 177 का प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार अगर कोई पब्लिक सर्वेंट/ लोक अधिकारी किसी सब्जेक्ट पर जानते हुए भी कोई असत्य सूचना देता है, सच छिपाता है, तो यह कानून की नज़र में अपराध काउंट होता है।

इस तरह का मामला अगर साबित हो जाता है तो दोषी को 6 महीने की सज़ा या जुर्माना या दोनों ही हो सकता है। इसमें जानबूझ कर एक लोक सेवक को झूठी सूचना देना शामिल है। इसे एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध माना गया है और यह किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

इसी प्रकार अगर सूचना कोई अपराध किए जाने इत्यादि के विषय में हो तो सजा बदलकर दो वर्ष के कारावास में तब्दील हो जाती है या आर्थिक दण्ड का प्रावधान लाया जाता है। इसे एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध कंसीडर किया है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय माना गया है। हालाँकि, यह क्राइम समझौता करने योग्य नहीं माना गया है।

हमें यह जान लेना चाहिए कि ऐसे कई सरकारी विभाग हैं जहाँ पुलिस अपने अधिकार के तहत पूछताछ कर सकती है और इन्वेस्टीगेशन के दौरान किसी भी डिपार्टमेंट के किसी भी अधिकारी से सूचना के लिए कांटेक्ट कर सकता है। ऐसे में सूचना देने वाला अगर असत्य इनफार्मेशन देता है तो यह एक निश्चित अपराध माना गया है।

इसी सिलसिले में यह जान लेना चाहिए कि अगर आप किसी गवर्नमेंट अफसर से कोई प्रमाण-पत्र इत्यादि बनवाते हैं और वह प्रमाण-पत्र गलत निकलता है तो भी धारा 177 काम करती है। ज़ाहिर तौर पर असत्य सूचना देने पर अगर कोई अपराधी बचकर निकल जाता है तो इसे गवर्नमेंट ऑफिसर का ही दोष माना जाता है और इस बारे में उपरोक्त तथ्यात्मक जानकारी के अनुसार हमारा भारतीय कानून बेहद स्पष्ट है।

हालाँकि, ऐसा माना जाता है कि सरकारी अधिकारियों को इन बारीक बातों की जानकारी होती है और वह असत्य जानकारी देने से बचते हैं, किन्तु लालच वश, भय वश या किसी और कारण से अगर वह असत्य जानकारी देते हैं तो उनका अपराध साबित होने पर उन्हें सजा भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।

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Web Title: Article 177 in Indian Law, When Government Servants speaks lie!

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