क्या है कुपोषण और यह होता क्यों है?

यह बात तकरीबन सभी जानते और मानते हैं कि एक स्वस्थ शरीर में एक स्वस्थ दिमाग का वास होता है। मतलब अगर हमारा शरीर ही स्वस्थ नहीं रहेगा तो फिर हम मानसिक रूप से भी कमजोर ही रहेंगे।

यह भी जानना महत्वपूर्ण है कि हमारे शरीर के कमजोर होने के प्रमुख कारण लम्बे समय तक बीमार रहना या फिर स्वस्थ और संतुलित भोजन ना मिलना हो सकता है। 

शरीर के विकास के लिए किसी भी व्यक्ति को उचित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा और फाइबर तथा शुद्ध जल की आवश्यकता होती है। अगर इन पोषक तत्वों में से किसी एक को भी पर्याप्त मात्रा में ग्रहण नहीं किया जाये तो लोग कुपोषण का शिकार हो सकते हैं।

कुपोषण मुख्य रूप से बच्चों में पाया जाता है और इसलिए यह कहीं ज्यादा चिंतनीय है।

Malnutrition in India (Pic: palpalindia)

भारत में कुपोषण से हालात इस प्रकार ख़राब हैं कि प्रत्येक वर्ष 5 साल से कम आयु के 10 लाख बच्चे इसका शिकार हो कर अपनी जान गँवा देते हैं। इस बात का खुलासा संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में हुई है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुपोषण की सबसे ख़राब अवस्था अनुसूचित जनजातियों में पाई गयी है।

क्यों होता है कुपोषण?

मुख्य रूप से अगर कुपोषण के कारणों पर नजर दौड़ाई जाए तो इसमें गरीबी तथा अशिक्षा को अहम् माना जाता है। हालाँकि, कुपोषण के कारणों में बढ़ती जनसंख्या भी कहीं न कहीं कारण बन रही है। क्योंकि किसी भी भूखंड पर जनसंख्या असंतुलित रूप से बढ़ने लगती है तो वहां पर रह रहे लोगों के रहन-सहन में असमानता आ जाती है।

बढ़ती जनसंख्या के कारण संसाधनों जैसे पेय-जल और भोजन को लेकर संकट उत्पन्न हो जाता है। इसके कारण भी उचित मात्रा में संतुलित भोजन मिल पाना संभव नहीं हो पाता है। इसके आलावा अशिक्षा को भी कुपोषण के कारणों में गिना जा सकता है। 

अशिक्षा के कारण पौष्टिक आहार के महत्व को लोग समझ नहीं पाते हैं और अपने दैनिक आहार में इसे स्थान नहीं देते हैं।


कुपोषण के लक्षण 

कुपोषण के लक्षणों के बारे में बात करें तो इसके कुछ सामान्य लक्षण आप आसानी से देख पाएंगे। जब कोई व्यक्ति कुपोषण का शिकार होता है तो उसके शरीर का विकास एक तरीके से रुक जाता है। उसकी मांसपेशियां सिकुड़ी नजर आने लगती हैं तथा त्वचा का रंग पीला और त्वचा ढीली नजर आती है।

जब कोई कुपोषित होता है तो थोड़ा काम करने पर ज्यादा थकान लगती है। व्यक्ति को कमजोरी महसूस होती है तथा उसे नींद ना आने की समस्या भी हो जाती है। कुपोषित व्यक्ति के पैरों के नीचे के हिस्से में सूजन बनी रहती है तथा त्वचा और बालों का रंग बदल जाना भी इसके अहम लक्षण हैं।

कुपोषण से बचाव के उपाय 

कुपोषण से बचाव के लिए सबसे अहम है कि आप संतुलित भोजन करें एवं घर के सभी बच्चों को उम्र के अनुसार संतुलित आहार दें। अगर इंसान संतुलित भोजन करता है जिसमें पर्याप्त मात्रा में दालें, दूध, अंडे और हरी सब्जियां शामिल हैं तो धीरे-धीरे कुपोषण की समस्या को समाप्त किया जा सकता है।

कुपोषण से लड़ रहे व्यक्ति को भीगे हुए चने देना चाहिए। इससे उसके शरीर में तेजी से बदलाव नजर आता है। कुपोषित व्यक्ति के खाने में प्रोटीन की अच्छी मात्रा भी अवश्य शामिल करें।
वहीं डॉक्टर की सलाह पर रोगी को आयरन और कैल्शियम की दवाइयां भी देनी चाहिए।

ध्यान रहे, एक बार अगर कोई कुपोषण का शिकार हो गया तो उस व्यक्ति के शरीर में रोग प्रतिरोधक-क्षमता बेहद कम हो जाती है। रोग प्रतिरोधक-क्षमता कम हो जाने के कारण वह आसानी से तमाम बीमारियों के चपेट में आ जाता है। इसलिए जितना संभव हो सके कुपोषित व्यक्ति को आराम कराएं और उसे भरपूर नींद लेने दें।


Web Title: Malnutrition in India Article In Hindi


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